सूरह Al-Infitar

سورة الانفطار

क़ुरआन की 114 सूरतों में 82वीं, मक्की, 19 आयतें। उस्मानी लिपि में पूरा अरबी पाठ (हफ़्स अन आसिम) और हिंदी अनुवाद।

#82मक्की19 आयतें
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सूरह संख्या
82
आयतें
19
अवतरण
मक्की
पारा
30
मुसहफ़ के पृष्ठ
587

सुनें · Mishary Rashid Alafasy

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

إِذَا ٱلسَّمَآءُ ٱنفَطَرَتْ ﴿١﴾

1जब आसमान तर्ख़ जाएगा

وَإِذَا ٱلْكَوَاكِبُ ٱنتَثَرَتْ ﴿٢﴾

2और जब तारे झड़ पड़ेंगे

وَإِذَا ٱلْبِحَارُ فُجِّرَتْ ﴿٣﴾

3और जब दरिया बह (कर एक दूसरे से मिल) जाएँगे

وَإِذَا ٱلْقُبُورُ بُعْثِرَتْ ﴿٤﴾

4और जब कब्रें उखाड़ दी जाएँगी

عَلِمَتْ نَفْسٌۭ مَّا قَدَّمَتْ وَأَخَّرَتْ ﴿٥﴾

5तब हर शख़्श को मालूम हो जाएगा कि उसने आगे क्या भेजा था और पीछे क्या छोड़ा था

يَٰٓأَيُّهَا ٱلْإِنسَٰنُ مَا غَرَّكَ بِرَبِّكَ ٱلْكَرِيمِ ﴿٦﴾

6ऐ इन्सान तुम्हें अपने परवरदिगार के बारे में किस चीज़ ने धोका दिया

ٱلَّذِى خَلَقَكَ فَسَوَّىٰكَ فَعَدَلَكَ ﴿٧﴾

7जिसने तुझे पैदा किया तो तुझे दुरूस्त बनाया और मुनासिब आज़ा दिए

فِىٓ أَىِّ صُورَةٍۢ مَّا شَآءَ رَكَّبَكَ ﴿٨﴾

8और जिस सूरत में उसने चाहा तेरे जोड़ बन्द मिलाए

كَلَّا بَلْ تُكَذِّبُونَ بِٱلدِّينِ ﴿٩﴾

9हाँ बात ये है कि तुम लोग जज़ा (के दिन) को झुठलाते हो

وَإِنَّ عَلَيْكُمْ لَحَٰفِظِينَ ﴿١٠﴾

10हालॉकि तुम पर निगेहबान मुक़र्रर हैं

كِرَامًۭا كَٰتِبِينَ ﴿١١﴾

11बुर्ज़ुग लोग (फरिश्ते सब बातों को) लिखने वाले (केरामन क़ातेबीन)

يَعْلَمُونَ مَا تَفْعَلُونَ ﴿١٢﴾

12जो कुछ तुम करते हो वह सब जानते हैं

إِنَّ ٱلْأَبْرَارَ لَفِى نَعِيمٍۢ ﴿١٣﴾

13बेशक नेको कार (बेहिश्त की) नेअमतों में होंगे

وَإِنَّ ٱلْفُجَّارَ لَفِى جَحِيمٍۢ ﴿١٤﴾

14और बदकार लोग यक़ीनन जहन्नुम में जज़ा के दिन

يَصْلَوْنَهَا يَوْمَ ٱلدِّينِ ﴿١٥﴾

15उसी में झोंके जाएँगे

وَمَا هُمْ عَنْهَا بِغَآئِبِينَ ﴿١٦﴾

16और वह लोग उससे छुप न सकेंगे

وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا يَوْمُ ٱلدِّينِ ﴿١٧﴾

17और तुम्हें क्या मालूम कि जज़ा का दिन क्या है

ثُمَّ مَآ أَدْرَىٰكَ مَا يَوْمُ ٱلدِّينِ ﴿١٨﴾

18फिर तुम्हें क्या मालूम कि जज़ा का दिन क्या चीज़ है

يَوْمَ لَا تَمْلِكُ نَفْسٌۭ لِّنَفْسٍۢ شَيْـًۭٔا ۖ وَٱلْأَمْرُ يَوْمَئِذٍۢ لِّلَّهِ ﴿١٩﴾

19उस दिन कोई शख़्श किसी शख़्श की भलाई न कर सकेगा और उस दिन हुक्म सिर्फ ख़ुदा ही का होगा

क़ुरआन का पाठ: तंज़ील प्रोजेक्ट (tanzil.net), उस्मानी लिपि, हूबहू प्रति, CC BY 3.0। अनुवाद: सुहेल फ़ारूक़ ख़ान और सैफ़ुर्रहमान नदवी।

सूरह Al-Infitar में कितनी आयतें हैं?

सूरह Al-Infitar में 19 आयतें हैं।

सूरह Al-Infitar मक्की है या मदनी?

सूरह Al-Infitar मक्की सूरह है, मुसहफ़ के क्रम में 82वीं।

सूरह Al-Infitar किस पारे में है?

सूरह Al-Infitar पारा 30 में है, मदीना मुसहफ़ के पृष्ठ 587 पर।