- सूरह संख्या
- 83
- आयतें
- 36
- अवतरण
- मक्की
- पारा
- 30
- मुसहफ़ के पृष्ठ
- 587-589
सुनें · Mishary Rashid Alafasy
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
وَيْلٌۭ لِّلْمُطَفِّفِينَ ﴿١﴾
1नाप तौल में कमी करने वालों की ख़राबी है
ٱلَّذِينَ إِذَا ٱكْتَالُوا۟ عَلَى ٱلنَّاسِ يَسْتَوْفُونَ ﴿٢﴾
2जो औरें से नाप कर लें तो पूरा पूरा लें
وَإِذَا كَالُوهُمْ أَو وَّزَنُوهُمْ يُخْسِرُونَ ﴿٣﴾
3और जब उनकी नाप या तौल कर दें तो कम कर दें
أَلَا يَظُنُّ أُو۟لَٰٓئِكَ أَنَّهُم مَّبْعُوثُونَ ﴿٤﴾
4क्या ये लोग इतना भी ख्याल नहीं करते
لِيَوْمٍ عَظِيمٍۢ ﴿٥﴾
5कि एक बड़े (सख्त) दिन (क़यामत) में उठाए जाएँगे
يَوْمَ يَقُومُ ٱلنَّاسُ لِرَبِّ ٱلْعَٰلَمِينَ ﴿٦﴾
6जिस दिन तमाम लोग सारे जहाँन के परवरदिगार के सामने खड़े होंगे
كَلَّآ إِنَّ كِتَٰبَ ٱلْفُجَّارِ لَفِى سِجِّينٍۢ ﴿٧﴾
7सुन रखो कि बदकारों के नाम ए अमाल सिज्जीन में हैं
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا سِجِّينٌۭ ﴿٨﴾
8तुमको क्या मालूम सिज्जीन क्या चीज़ है
كِتَٰبٌۭ مَّرْقُومٌۭ ﴿٩﴾
9एक लिखा हुआ दफ़तर है जिसमें शयातीन के (आमाल दर्ज हैं)
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿١٠﴾
10उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है
ٱلَّذِينَ يُكَذِّبُونَ بِيَوْمِ ٱلدِّينِ ﴿١١﴾
11जो लोग रोजे ज़ज़ा को झुठलाते हैं
وَمَا يُكَذِّبُ بِهِۦٓ إِلَّا كُلُّ مُعْتَدٍ أَثِيمٍ ﴿١٢﴾
12हालॉकि उसको हद से निकल जाने वाले गुनाहगार के सिवा कोई नहीं झुठलाता
إِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِ ءَايَٰتُنَا قَالَ أَسَٰطِيرُ ٱلْأَوَّلِينَ ﴿١٣﴾
13जब उसके सामने हमारी आयतें पढ़ी जाती हैं तो कहता है कि ये तो अगलों के अफसाने हैं
كَلَّا ۖ بَلْ ۜ رَانَ عَلَىٰ قُلُوبِهِم مَّا كَانُوا۟ يَكْسِبُونَ ﴿١٤﴾
14नहीं नहीं बात ये है कि ये लोग जो आमाल (बद) करते हैं उनका उनके दिलों पर जंग बैठ गया है
كَلَّآ إِنَّهُمْ عَن رَّبِّهِمْ يَوْمَئِذٍۢ لَّمَحْجُوبُونَ ﴿١٥﴾
15बेशक ये लोग उस दिन अपने परवरदिगार (की रहमत से) रोक दिए जाएँगे
ثُمَّ إِنَّهُمْ لَصَالُوا۟ ٱلْجَحِيمِ ﴿١٦﴾
16फिर ये लोग ज़रूर जहन्नुम वासिल होंगे
ثُمَّ يُقَالُ هَٰذَا ٱلَّذِى كُنتُم بِهِۦ تُكَذِّبُونَ ﴿١٧﴾
17फिर उनसे कहा जाएगा कि ये वही चीज़ तो है जिसे तुम झुठलाया करते थे
كَلَّآ إِنَّ كِتَٰبَ ٱلْأَبْرَارِ لَفِى عِلِّيِّينَ ﴿١٨﴾
18ये भी सुन रखो कि नेको के नाम ए अमाल इल्लीयीन में होंगे
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا عِلِّيُّونَ ﴿١٩﴾
19और तुमको क्या मालूम कि इल्लीयीन क्या है वह एक लिखा हुआ दफ़तर है
كِتَٰبٌۭ مَّرْقُومٌۭ ﴿٢٠﴾
20जिसमें नेकों के आमाल दर्ज हैं
يَشْهَدُهُ ٱلْمُقَرَّبُونَ ﴿٢١﴾
21उसके पास मुक़र्रिब (फ़रिश्ते) हाज़िर हैं
إِنَّ ٱلْأَبْرَارَ لَفِى نَعِيمٍ ﴿٢٢﴾
22बेशक नेक लोग नेअमतों में होंगे
عَلَى ٱلْأَرَآئِكِ يَنظُرُونَ ﴿٢٣﴾
23तख्तों पर बैठे नज़ारे करेंगे
تَعْرِفُ فِى وُجُوهِهِمْ نَضْرَةَ ٱلنَّعِيمِ ﴿٢٤﴾
24तुम उनके चेहरों ही से राहत की ताज़गी मालूम कर लोगे
يُسْقَوْنَ مِن رَّحِيقٍۢ مَّخْتُومٍ ﴿٢٥﴾
25उनको सर ब मोहर ख़ालिस शराब पिलायी जाएगी
خِتَٰمُهُۥ مِسْكٌۭ ۚ وَفِى ذَٰلِكَ فَلْيَتَنَافَسِ ٱلْمُتَنَٰفِسُونَ ﴿٢٦﴾
26जिसकी मोहर मिश्क की होगी और उसकी तरफ अलबत्ता शायक़ीन को रग़बत करनी चाहिए
وَمِزَاجُهُۥ مِن تَسْنِيمٍ ﴿٢٧﴾
27और उस (शराब) में तसनीम के पानी की आमेज़िश होगी
عَيْنًۭا يَشْرَبُ بِهَا ٱلْمُقَرَّبُونَ ﴿٢٨﴾
28वह एक चश्मा है जिसमें मुक़रेबीन पियेंगे
إِنَّ ٱلَّذِينَ أَجْرَمُوا۟ كَانُوا۟ مِنَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ يَضْحَكُونَ ﴿٢٩﴾
29बेशक जो गुनाहगार मोमिनों से हँसी किया करते थे
وَإِذَا مَرُّوا۟ بِهِمْ يَتَغَامَزُونَ ﴿٣٠﴾
30और जब उनके पास से गुज़रते तो उन पर चशमक करते थे
وَإِذَا ٱنقَلَبُوٓا۟ إِلَىٰٓ أَهْلِهِمُ ٱنقَلَبُوا۟ فَكِهِينَ ﴿٣١﴾
31और जब अपने लड़के वालों की तरफ़ लौट कर आते थे तो इतराते हुए
وَإِذَا رَأَوْهُمْ قَالُوٓا۟ إِنَّ هَٰٓؤُلَآءِ لَضَآلُّونَ ﴿٣٢﴾
32और जब उन मोमिनीन को देखते तो कह बैठते थे कि ये तो यक़ीनी गुमराह हैं
وَمَآ أُرْسِلُوا۟ عَلَيْهِمْ حَٰفِظِينَ ﴿٣٣﴾
33हालॉकि ये लोग उन पर कुछ निगराँ बना के तो भेजे नहीं गए थे
فَٱلْيَوْمَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ مِنَ ٱلْكُفَّارِ يَضْحَكُونَ ﴿٣٤﴾
34तो आज (क़यामत में) ईमानदार लोग काफ़िरों से हँसी करेंगे
عَلَى ٱلْأَرَآئِكِ يَنظُرُونَ ﴿٣٥﴾
35(और) तख्तों पर बैठे नज़ारे करेंगे
هَلْ ثُوِّبَ ٱلْكُفَّارُ مَا كَانُوا۟ يَفْعَلُونَ ﴿٣٦﴾
36कि अब तो काफ़िरों को उनके किए का पूरा पूरा बदला मिल गया
क़ुरआन का पाठ: तंज़ील प्रोजेक्ट (tanzil.net), उस्मानी लिपि, हूबहू प्रति, CC BY 3.0। अनुवाद: सुहेल फ़ारूक़ ख़ान और सैफ़ुर्रहमान नदवी।
सूरह Al-Mutaffifin में कितनी आयतें हैं?
सूरह Al-Mutaffifin में 36 आयतें हैं।
सूरह Al-Mutaffifin मक्की है या मदनी?
सूरह Al-Mutaffifin मक्की सूरह है, मुसहफ़ के क्रम में 83वीं।
सूरह Al-Mutaffifin किस पारे में है?
सूरह Al-Mutaffifin पारा 30 में है, मदीना मुसहफ़ के पृष्ठ 587-589 पर।