- सूरह संख्या
- 113
- आयतें
- 5
- अवतरण
- मक्की
- पारा
- 30
- मुसहफ़ के पृष्ठ
- 604
सुनें · Mishary Rashid Alafasy
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلْفَلَقِ ﴿١﴾
1(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं सुबह के मालिक की
مِن شَرِّ مَا خَلَقَ ﴿٢﴾
2हर चीज़ की बुराई से जो उसने पैदा की पनाह माँगता हूँ
وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ ﴿٣﴾
3और अंधेरीरात की बुराई से जब उसका अंधेरा छा जाए
وَمِن شَرِّ ٱلنَّفَّٰثَٰتِ فِى ٱلْعُقَدِ ﴿٤﴾
4और गन्डों पर फूँकने वालियों की बुराई से
وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ ﴿٥﴾
5(जब फूँके) और हसद करने वाले की बुराई से
क़ुरआन का पाठ: तंज़ील प्रोजेक्ट (tanzil.net), उस्मानी लिपि, हूबहू प्रति, CC BY 3.0। अनुवाद: सुहेल फ़ारूक़ ख़ान और सैफ़ुर्रहमान नदवी।
सूरह Al-Falaq में कितनी आयतें हैं?
सूरह Al-Falaq में 5 आयतें हैं।
सूरह Al-Falaq मक्की है या मदनी?
सूरह Al-Falaq मक्की सूरह है, मुसहफ़ के क्रम में 113वीं।
सूरह Al-Falaq किस पारे में है?
सूरह Al-Falaq पारा 30 में है, मदीना मुसहफ़ के पृष्ठ 604 पर।