सूरह Al-Ikhlas

سورة الإخلاص

क़ुरआन की 114 सूरतों में 112वीं, मक्की, 4 आयतें। उस्मानी लिपि में पूरा अरबी पाठ (हफ़्स अन आसिम) और हिंदी अनुवाद।

#112मक्की4 आयतें
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सूरह संख्या
112
आयतें
4
अवतरण
मक्की
पारा
30
मुसहफ़ के पृष्ठ
604

सुनें · Mishary Rashid Alafasy

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

قُلْ هُوَ ٱللَّهُ أَحَدٌ ﴿١﴾

1(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ख़ुदा एक है

ٱللَّهُ ٱلصَّمَدُ ﴿٢﴾

2ख़ुदा बरहक़ बेनियाज़ है

لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ ﴿٣﴾

3न उसने किसी को जना न उसको किसी ने जना,

وَلَمْ يَكُن لَّهُۥ كُفُوًا أَحَدٌۢ ﴿٤﴾

4और उसका कोई हमसर नहीं

क़ुरआन का पाठ: तंज़ील प्रोजेक्ट (tanzil.net), उस्मानी लिपि, हूबहू प्रति, CC BY 3.0। अनुवाद: सुहेल फ़ारूक़ ख़ान और सैफ़ुर्रहमान नदवी।

सूरह Al-Ikhlas में कितनी आयतें हैं?

सूरह Al-Ikhlas में 4 आयतें हैं।

सूरह Al-Ikhlas मक्की है या मदनी?

सूरह Al-Ikhlas मक्की सूरह है, मुसहफ़ के क्रम में 112वीं।

सूरह Al-Ikhlas किस पारे में है?

सूरह Al-Ikhlas पारा 30 में है, मदीना मुसहफ़ के पृष्ठ 604 पर।