- सूरह संख्या
- 110
- आयतें
- 3
- अवतरण
- मदनी
- पारा
- 30
- मुसहफ़ के पृष्ठ
- 603
सुनें · Mishary Rashid Alafasy
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
إِذَا جَآءَ نَصْرُ ٱللَّهِ وَٱلْفَتْحُ ﴿١﴾
1ऐ रसूल जब ख़ुदा की मदद आ पहँचेगी
وَرَأَيْتَ ٱلنَّاسَ يَدْخُلُونَ فِى دِينِ ٱللَّهِ أَفْوَاجًۭا ﴿٢﴾
2और फतेह (मक्का) हो जाएगी और तुम लोगों को देखोगे कि गोल के गोल ख़ुदा के दीन में दाख़िल हो रहे हैं
فَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ وَٱسْتَغْفِرْهُ ۚ إِنَّهُۥ كَانَ تَوَّابًۢا ﴿٣﴾
3तो तुम अपने परवरदिगार की तारीफ़ के साथ तसबीह करना और उसी से मग़फेरत की दुआ माँगना वह बेशक बड़ा माफ़ करने वाला है
क़ुरआन का पाठ: तंज़ील प्रोजेक्ट (tanzil.net), उस्मानी लिपि, हूबहू प्रति, CC BY 3.0। अनुवाद: सुहेल फ़ारूक़ ख़ान और सैफ़ुर्रहमान नदवी।
सूरह An-Nasr में कितनी आयतें हैं?
सूरह An-Nasr में 3 आयतें हैं।
सूरह An-Nasr मक्की है या मदनी?
सूरह An-Nasr मदनी सूरह है, मुसहफ़ के क्रम में 110वीं।
सूरह An-Nasr किस पारे में है?
सूरह An-Nasr पारा 30 में है, मदीना मुसहफ़ के पृष्ठ 603 पर।