- सूरह संख्या
- 96
- आयतें
- 19
- अवतरण
- मक्की
- पारा
- 30
- मुसहफ़ के पृष्ठ
- 597
- सजदे की आयत
- 96:19
सुनें · Mishary Rashid Alafasy
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
ٱقْرَأْ بِٱسْمِ رَبِّكَ ٱلَّذِى خَلَقَ ﴿١﴾
1(ऐ रसूल) अपने परवरदिगार का नाम लेकर पढ़ो जिसने हर (चीज़ को) पैदा किया
خَلَقَ ٱلْإِنسَٰنَ مِنْ عَلَقٍ ﴿٢﴾
2उस ने इन्सान को जमे हुए ख़ून से पैदा किया पढ़ो
ٱقْرَأْ وَرَبُّكَ ٱلْأَكْرَمُ ﴿٣﴾
3और तुम्हारा परवरदिगार बड़ा क़रीम है
ٱلَّذِى عَلَّمَ بِٱلْقَلَمِ ﴿٤﴾
4जिसने क़लम के ज़रिए तालीम दी
عَلَّمَ ٱلْإِنسَٰنَ مَا لَمْ يَعْلَمْ ﴿٥﴾
5उसीने इन्सान को वह बातें बतायीं जिनको वह कुछ जानता ही न था
كَلَّآ إِنَّ ٱلْإِنسَٰنَ لَيَطْغَىٰٓ ﴿٦﴾
6सुन रखो बेशक इन्सान जो अपने को ग़नी देखता है
أَن رَّءَاهُ ٱسْتَغْنَىٰٓ ﴿٧﴾
7तो सरकश हो जाता है
إِنَّ إِلَىٰ رَبِّكَ ٱلرُّجْعَىٰٓ ﴿٨﴾
8बेशक तुम्हारे परवरदिगार की तरफ (सबको) पलटना है
أَرَءَيْتَ ٱلَّذِى يَنْهَىٰ ﴿٩﴾
9भला तुमने उस शख़्श को भी देखा
عَبْدًا إِذَا صَلَّىٰٓ ﴿١٠﴾
10जो एक बन्दे को जब वह नमाज़ पढ़ता है तो वह रोकता है
أَرَءَيْتَ إِن كَانَ عَلَى ٱلْهُدَىٰٓ ﴿١١﴾
11भला देखो तो कि अगर ये राहे रास्त पर हो या परहेज़गारी का हुक्म करे
أَوْ أَمَرَ بِٱلتَّقْوَىٰٓ ﴿١٢﴾
12(तो रोकना कैसा)
أَرَءَيْتَ إِن كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰٓ ﴿١٣﴾
13भला देखो तो कि अगर उसने (सच्चे को) झुठला दिया और (उसने) मुँह फेरा
أَلَمْ يَعْلَم بِأَنَّ ٱللَّهَ يَرَىٰ ﴿١٤﴾
14(तो नतीजा क्या होगा) क्या उसको ये मालूम नहीं कि ख़ुदा यक़ीनन देख रहा है
كَلَّا لَئِن لَّمْ يَنتَهِ لَنَسْفَعًۢا بِٱلنَّاصِيَةِ ﴿١٥﴾
15देखो अगर वह बाज़ न आएगा तो हम परेशानी के पट्टे पकड़ के घसीटेंगे
نَاصِيَةٍۢ كَٰذِبَةٍ خَاطِئَةٍۢ ﴿١٦﴾
16झूठे ख़तावार की पेशानी के पट्टे
فَلْيَدْعُ نَادِيَهُۥ ﴿١٧﴾
17तो वह अपने याराने जलसा को बुलाए हम भी जल्लाद फ़रिश्ते को बुलाएँगे
سَنَدْعُ ٱلزَّبَانِيَةَ ﴿١٨﴾
18(ऐ रसूल) देखो हरगिज़ उनका कहना न मानना
كَلَّا لَا تُطِعْهُ وَٱسْجُدْ وَٱقْتَرِب ۩ ﴿١٩﴾
19और सजदे करते रहो और कुर्ब हासिल करो (19) (सजदा)
क़ुरआन का पाठ: तंज़ील प्रोजेक्ट (tanzil.net), उस्मानी लिपि, हूबहू प्रति, CC BY 3.0। अनुवाद: सुहेल फ़ारूक़ ख़ान और सैफ़ुर्रहमान नदवी।
सूरह Al-'Alaq में कितनी आयतें हैं?
सूरह Al-'Alaq में 19 आयतें हैं।
सूरह Al-'Alaq मक्की है या मदनी?
सूरह Al-'Alaq मक्की सूरह है, मुसहफ़ के क्रम में 96वीं।
सूरह Al-'Alaq किस पारे में है?
सूरह Al-'Alaq पारा 30 में है, मदीना मुसहफ़ के पृष्ठ 597 पर।