- सूरह संख्या
- 90
- आयतें
- 20
- अवतरण
- मक्की
- पारा
- 30
- मुसहफ़ के पृष्ठ
- 594
सुनें · Mishary Rashid Alafasy
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
لَآ أُقْسِمُ بِهَٰذَا ٱلْبَلَدِ ﴿١﴾
1मुझे इस शहर (मक्का) की कसम
وَأَنتَ حِلٌّۢ بِهَٰذَا ٱلْبَلَدِ ﴿٢﴾
2और तुम इसी शहर में तो रहते हो
وَوَالِدٍۢ وَمَا وَلَدَ ﴿٣﴾
3और (तुम्हारे) बाप (आदम) और उसकी औलाद की क़सम
لَقَدْ خَلَقْنَا ٱلْإِنسَٰنَ فِى كَبَدٍ ﴿٤﴾
4हमने इन्सान को मशक्क़त में (रहने वाला) पैदा किया है
أَيَحْسَبُ أَن لَّن يَقْدِرَ عَلَيْهِ أَحَدٌۭ ﴿٥﴾
5क्या वह ये समझता है कि उस पर कोई काबू न पा सकेगा
يَقُولُ أَهْلَكْتُ مَالًۭا لُّبَدًا ﴿٦﴾
6वह कहता है कि मैने अलग़ारों माल उड़ा दिया
أَيَحْسَبُ أَن لَّمْ يَرَهُۥٓ أَحَدٌ ﴿٧﴾
7क्या वह ये ख्याल रखता है कि उसको किसी ने देखा ही नहीं
أَلَمْ نَجْعَل لَّهُۥ عَيْنَيْنِ ﴿٨﴾
8क्या हमने उसे दोनों ऑंखें और ज़बान
وَلِسَانًۭا وَشَفَتَيْنِ ﴿٩﴾
9और दोनों लब नहीं दिए (ज़रूर दिए)
وَهَدَيْنَٰهُ ٱلنَّجْدَيْنِ ﴿١٠﴾
10और उसको (अच्छी बुरी) दोनों राहें भी दिखा दीं
فَلَا ٱقْتَحَمَ ٱلْعَقَبَةَ ﴿١١﴾
11फिर वह घाटी पर से होकर (क्यों) नहीं गुज़रा
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا ٱلْعَقَبَةُ ﴿١٢﴾
12और तुमको क्या मालूम कि घाटी क्या है
فَكُّ رَقَبَةٍ ﴿١٣﴾
13किसी (की) गर्दन का (गुलामी या कर्ज से) छुड़ाना
أَوْ إِطْعَٰمٌۭ فِى يَوْمٍۢ ذِى مَسْغَبَةٍۢ ﴿١٤﴾
14या भूख के दिन रिश्तेदार यतीम या ख़ाकसार
يَتِيمًۭا ذَا مَقْرَبَةٍ ﴿١٥﴾
15मोहताज को
أَوْ مِسْكِينًۭا ذَا مَتْرَبَةٍۢ ﴿١٦﴾
16खाना खिलाना
ثُمَّ كَانَ مِنَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَتَوَاصَوْا۟ بِٱلصَّبْرِ وَتَوَاصَوْا۟ بِٱلْمَرْحَمَةِ ﴿١٧﴾
17फिर तो उन लोगों में (शामिल) हो जाता जो ईमान लाए और सब्र की नसीहत और तरस खाने की वसीयत करते रहे
أُو۟لَٰٓئِكَ أَصْحَٰبُ ٱلْمَيْمَنَةِ ﴿١٨﴾
18यही लोग ख़ुश नसीब हैं
وَٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ بِـَٔايَٰتِنَا هُمْ أَصْحَٰبُ ٱلْمَشْـَٔمَةِ ﴿١٩﴾
19और जिन लोगों ने हमारी आयतों से इन्कार किया है यही लोग बदबख्त हैं
عَلَيْهِمْ نَارٌۭ مُّؤْصَدَةٌۢ ﴿٢٠﴾
20कि उनको आग में डाल कर हर तरफ से बन्द कर दिया जाएगा
क़ुरआन का पाठ: तंज़ील प्रोजेक्ट (tanzil.net), उस्मानी लिपि, हूबहू प्रति, CC BY 3.0। अनुवाद: सुहेल फ़ारूक़ ख़ान और सैफ़ुर्रहमान नदवी।
सूरह Al-Balad में कितनी आयतें हैं?
सूरह Al-Balad में 20 आयतें हैं।
सूरह Al-Balad मक्की है या मदनी?
सूरह Al-Balad मक्की सूरह है, मुसहफ़ के क्रम में 90वीं।
सूरह Al-Balad किस पारे में है?
सूरह Al-Balad पारा 30 में है, मदीना मुसहफ़ के पृष्ठ 594 पर।