- सूरह संख्या
- 88
- आयतें
- 26
- अवतरण
- मक्की
- पारा
- 30
- मुसहफ़ के पृष्ठ
- 592
सुनें · Mishary Rashid Alafasy
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
هَلْ أَتَىٰكَ حَدِيثُ ٱلْغَٰشِيَةِ ﴿١﴾
1भला तुमको ढाँप लेने वाली मुसीबत (क़यामत) का हाल मालुम हुआ है
وُجُوهٌۭ يَوْمَئِذٍ خَٰشِعَةٌ ﴿٢﴾
2उस दिन बहुत से चेहरे ज़लील रूसवा होंगे
عَامِلَةٌۭ نَّاصِبَةٌۭ ﴿٣﴾
3(तौक़ व जंज़ीर से) मयक्क़त करने वाले
تَصْلَىٰ نَارًا حَامِيَةًۭ ﴿٤﴾
4थके माँदे दहकती हुई आग में दाखिल होंगे
تُسْقَىٰ مِنْ عَيْنٍ ءَانِيَةٍۢ ﴿٥﴾
5उन्हें एक खौलते हुए चशमें का पानी पिलाया जाएगा
لَّيْسَ لَهُمْ طَعَامٌ إِلَّا مِن ضَرِيعٍۢ ﴿٦﴾
6ख़ारदार झाड़ी के सिवा उनके लिए कोई खाना नहीं
لَّا يُسْمِنُ وَلَا يُغْنِى مِن جُوعٍۢ ﴿٧﴾
7जो मोटाई पैदा करे न भूख में कुछ काम आएगा
وُجُوهٌۭ يَوْمَئِذٍۢ نَّاعِمَةٌۭ ﴿٨﴾
8(और) बहुत से चेहरे उस दिन तरो ताज़ा होंगे
لِّسَعْيِهَا رَاضِيَةٌۭ ﴿٩﴾
9अपनी कोशिश (के नतीजे) पर शादमान
فِى جَنَّةٍ عَالِيَةٍۢ ﴿١٠﴾
10एक आलीशान बाग़ में
لَّا تَسْمَعُ فِيهَا لَٰغِيَةًۭ ﴿١١﴾
11वहाँ कोई लग़ो बात सुनेंगे ही नहीं
فِيهَا عَيْنٌۭ جَارِيَةٌۭ ﴿١٢﴾
12उसमें चश्में जारी होंगें
فِيهَا سُرُرٌۭ مَّرْفُوعَةٌۭ ﴿١٣﴾
13उसमें ऊँचे ऊँचे तख्त बिछे होंगे
وَأَكْوَابٌۭ مَّوْضُوعَةٌۭ ﴿١٤﴾
14और (उनके किनारे) गिलास रखे होंगे
وَنَمَارِقُ مَصْفُوفَةٌۭ ﴿١٥﴾
15और गाँव तकिए क़तार की क़तार लगे होंगे
وَزَرَابِىُّ مَبْثُوثَةٌ ﴿١٦﴾
16और नफ़ीस मसनदे बिछी हुई
أَفَلَا يَنظُرُونَ إِلَى ٱلْإِبِلِ كَيْفَ خُلِقَتْ ﴿١٧﴾
17तो क्या ये लोग ऊँट की तरह ग़ौर नहीं करते कि कैसा अजीब पैदा किया गया है
وَإِلَى ٱلسَّمَآءِ كَيْفَ رُفِعَتْ ﴿١٨﴾
18और आसमान की तरफ कि क्या बुलन्द बनाया गया है
وَإِلَى ٱلْجِبَالِ كَيْفَ نُصِبَتْ ﴿١٩﴾
19और पहाड़ों की तरफ़ कि किस तरह खड़े किए गए हैं
وَإِلَى ٱلْأَرْضِ كَيْفَ سُطِحَتْ ﴿٢٠﴾
20और ज़मीन की तरफ कि किस तरह बिछायी गयी है
فَذَكِّرْ إِنَّمَآ أَنتَ مُذَكِّرٌۭ ﴿٢١﴾
21तो तुम नसीहत करते रहो तुम तो बस नसीहत करने वाले हो
لَّسْتَ عَلَيْهِم بِمُصَيْطِرٍ ﴿٢٢﴾
22तुम कुछ उन पर दरोग़ा तो हो नहीं
إِلَّا مَن تَوَلَّىٰ وَكَفَرَ ﴿٢٣﴾
23हाँ जिसने मुँह फेर लिया
فَيُعَذِّبُهُ ٱللَّهُ ٱلْعَذَابَ ٱلْأَكْبَرَ ﴿٢٤﴾
24और न माना तो ख़ुदा उसको बहुत बड़े अज़ाब की सज़ा देगा
إِنَّ إِلَيْنَآ إِيَابَهُمْ ﴿٢٥﴾
25बेशक उनको हमारी तरफ़ लौट कर आना है
ثُمَّ إِنَّ عَلَيْنَا حِسَابَهُم ﴿٢٦﴾
26फिर उनका हिसाब हमारे ज़िम्मे है
क़ुरआन का पाठ: तंज़ील प्रोजेक्ट (tanzil.net), उस्मानी लिपि, हूबहू प्रति, CC BY 3.0। अनुवाद: सुहेल फ़ारूक़ ख़ान और सैफ़ुर्रहमान नदवी।
सूरह Al-Ghashiyah में कितनी आयतें हैं?
सूरह Al-Ghashiyah में 26 आयतें हैं।
सूरह Al-Ghashiyah मक्की है या मदनी?
सूरह Al-Ghashiyah मक्की सूरह है, मुसहफ़ के क्रम में 88वीं।
सूरह Al-Ghashiyah किस पारे में है?
सूरह Al-Ghashiyah पारा 30 में है, मदीना मुसहफ़ के पृष्ठ 592 पर।