- सूरह संख्या
- 77
- आयतें
- 50
- अवतरण
- मक्की
- पारा
- 29
- मुसहफ़ के पृष्ठ
- 580-581
सुनें · Mishary Rashid Alafasy
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
وَٱلْمُرْسَلَٰتِ عُرْفًۭا ﴿١﴾
1हवाओं की क़सम जो (पहले) धीमी चलती हैं
فَٱلْعَٰصِفَٰتِ عَصْفًۭا ﴿٢﴾
2फिर ज़ोर पकड़ के ऑंधी हो जाती हैं
وَٱلنَّٰشِرَٰتِ نَشْرًۭا ﴿٣﴾
3और (बादलों को) उभार कर फैला देती हैं
فَٱلْفَٰرِقَٰتِ فَرْقًۭا ﴿٤﴾
4फिर (उनको) फाड़ कर जुदा कर देती हैं
فَٱلْمُلْقِيَٰتِ ذِكْرًا ﴿٥﴾
5फिर फरिश्तों की क़सम जो वही लाते हैं
عُذْرًا أَوْ نُذْرًا ﴿٦﴾
6ताकि हुज्जत तमाम हो और डरा दिया जाए
إِنَّمَا تُوعَدُونَ لَوَٰقِعٌۭ ﴿٧﴾
7कि जिस बात का तुमसे वायदा किया जाता है वह ज़रूर होकर रहेगा
فَإِذَا ٱلنُّجُومُ طُمِسَتْ ﴿٨﴾
8फिर जब तारों की चमक जाती रहेगी
وَإِذَا ٱلسَّمَآءُ فُرِجَتْ ﴿٩﴾
9और जब आसमान फट जाएगा
وَإِذَا ٱلْجِبَالُ نُسِفَتْ ﴿١٠﴾
10और जब पहाड़ (रूई की तरह) उड़े उड़े फिरेंगे
وَإِذَا ٱلرُّسُلُ أُقِّتَتْ ﴿١١﴾
11और जब पैग़म्बर लोग एक मुअय्यन वक्त पर जमा किए जाएँगे
لِأَىِّ يَوْمٍ أُجِّلَتْ ﴿١٢﴾
12(फिर) भला इन (बातों) में किस दिन के लिए ताख़ीर की गयी है
لِيَوْمِ ٱلْفَصْلِ ﴿١٣﴾
13फ़ैसले के दिन के लिए
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا يَوْمُ ٱلْفَصْلِ ﴿١٤﴾
14और तुमको क्या मालूम की फ़ैसले का दिन क्या है
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿١٥﴾
15उस दिन झुठलाने वालों की मिट्टी ख़राब है
أَلَمْ نُهْلِكِ ٱلْأَوَّلِينَ ﴿١٦﴾
16क्या हमने अगलों को हलाक नहीं किया
ثُمَّ نُتْبِعُهُمُ ٱلْءَاخِرِينَ ﴿١٧﴾
17फिर उनके पीछे पीछे पिछलों को भी चलता करेंगे
كَذَٰلِكَ نَفْعَلُ بِٱلْمُجْرِمِينَ ﴿١٨﴾
18हम गुनेहगारों के साथ ऐसा ही किया करते हैं
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿١٩﴾
19उस दिन झुठलाने वालों की मिट्टी ख़राब है
أَلَمْ نَخْلُقكُّم مِّن مَّآءٍۢ مَّهِينٍۢ ﴿٢٠﴾
20क्या हमने तुमको ज़लील पानी (मनी) से पैदा नहीं किया
فَجَعَلْنَٰهُ فِى قَرَارٍۢ مَّكِينٍ ﴿٢١﴾
21फिर हमने उसको एक मुअय्यन वक्त तक
إِلَىٰ قَدَرٍۢ مَّعْلُومٍۢ ﴿٢٢﴾
22एक महफूज़ मक़ाम (रहम) में रखा
فَقَدَرْنَا فَنِعْمَ ٱلْقَٰدِرُونَ ﴿٢٣﴾
23फिर (उसका) एक अन्दाज़ा मुक़र्रर किया तो हम कैसा अच्छा अन्दाज़ा मुक़र्रर करने वाले हैं
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿٢٤﴾
24उन दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है
أَلَمْ نَجْعَلِ ٱلْأَرْضَ كِفَاتًا ﴿٢٥﴾
25क्या हमने ज़मीन को ज़िन्दों और मुर्दों को समेटने वाली नहीं बनाया
أَحْيَآءًۭ وَأَمْوَٰتًۭا ﴿٢٦﴾
26और उसमें ऊँचे ऊँचे अटल पहाड़ रख दिए
وَجَعَلْنَا فِيهَا رَوَٰسِىَ شَٰمِخَٰتٍۢ وَأَسْقَيْنَٰكُم مَّآءًۭ فُرَاتًۭا ﴿٢٧﴾
27और तुम लोगों को मीठा पानी पिलाया
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿٢٨﴾
28उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है
ٱنطَلِقُوٓا۟ إِلَىٰ مَا كُنتُم بِهِۦ تُكَذِّبُونَ ﴿٢٩﴾
29जिस चीज़ को तुम झुठलाया करते थे अब उसकी तरफ़ चलो
ٱنطَلِقُوٓا۟ إِلَىٰ ظِلٍّۢ ذِى ثَلَٰثِ شُعَبٍۢ ﴿٣٠﴾
30(धुएँ के) साये की तरफ़ चलो जिसके तीन हिस्से हैं
لَّا ظَلِيلٍۢ وَلَا يُغْنِى مِنَ ٱللَّهَبِ ﴿٣١﴾
31जिसमें न ठन्डक है और न जहन्नुम की लपक से बचाएगा
إِنَّهَا تَرْمِى بِشَرَرٍۢ كَٱلْقَصْرِ ﴿٣٢﴾
32उससे इतने बड़े बड़े अंगारे बरसते होंगे जैसे महल
كَأَنَّهُۥ جِمَٰلَتٌۭ صُفْرٌۭ ﴿٣٣﴾
33गोया ज़र्द रंग के ऊँट हैं
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿٣٤﴾
34उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है
هَٰذَا يَوْمُ لَا يَنطِقُونَ ﴿٣٥﴾
35ये वह दिन होगा कि लोग लब तक न हिला सकेंगे
وَلَا يُؤْذَنُ لَهُمْ فَيَعْتَذِرُونَ ﴿٣٦﴾
36और उनको इजाज़त दी जाएगी कि कुछ उज्र माअज़ेरत कर सकें
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿٣٧﴾
37उस दिन झुठलाने वालों की तबाही है
هَٰذَا يَوْمُ ٱلْفَصْلِ ۖ جَمَعْنَٰكُمْ وَٱلْأَوَّلِينَ ﴿٣٨﴾
38यही फैसले का दिन है (जिस में) हमने तुमको और अगलों को इकट्ठा किया है
فَإِن كَانَ لَكُمْ كَيْدٌۭ فَكِيدُونِ ﴿٣٩﴾
39तो अगर तुम्हें कोई दाँव करना हो तो आओ चल चुको
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿٤٠﴾
40उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है
إِنَّ ٱلْمُتَّقِينَ فِى ظِلَٰلٍۢ وَعُيُونٍۢ ﴿٤١﴾
41बेशक परहेज़गार लोग (दरख्तों की) घनी छाँव में होंगे
وَفَوَٰكِهَ مِمَّا يَشْتَهُونَ ﴿٤٢﴾
42और चश्मों और आदमियों में जो उन्हें मरग़ूब हो
كُلُوا۟ وَٱشْرَبُوا۟ هَنِيٓـًٔۢا بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ ﴿٤٣﴾
43(दुनिया में) जो अमल करते थे उसके बदले में मज़े से खाओ पियो
إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ ﴿٤٤﴾
44मुबारक हम नेकोकारों को ऐसा ही बदला दिया करते हैं
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿٤٥﴾
45उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है
كُلُوا۟ وَتَمَتَّعُوا۟ قَلِيلًا إِنَّكُم مُّجْرِمُونَ ﴿٤٦﴾
46(झुठलाने वालों) चन्द दिन चैन से खा पी लो तुम बेशक गुनेहगार हो
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿٤٧﴾
47उस दिन झुठलाने वालों की मिट्टी ख़राब है
وَإِذَا قِيلَ لَهُمُ ٱرْكَعُوا۟ لَا يَرْكَعُونَ ﴿٤٨﴾
48और जब उनसे कहा जाता है कि रूकूउ करों तो रूकूउ नहीं करते
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿٤٩﴾
49उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है
فَبِأَىِّ حَدِيثٍۭ بَعْدَهُۥ يُؤْمِنُونَ ﴿٥٠﴾
50अब इसके बाद ये किस बात पर ईमान लाएँगे
क़ुरआन का पाठ: तंज़ील प्रोजेक्ट (tanzil.net), उस्मानी लिपि, हूबहू प्रति, CC BY 3.0। अनुवाद: सुहेल फ़ारूक़ ख़ान और सैफ़ुर्रहमान नदवी।
सूरह Al-Mursalat में कितनी आयतें हैं?
सूरह Al-Mursalat में 50 आयतें हैं।
सूरह Al-Mursalat मक्की है या मदनी?
सूरह Al-Mursalat मक्की सूरह है, मुसहफ़ के क्रम में 77वीं।
सूरह Al-Mursalat किस पारे में है?
सूरह Al-Mursalat पारा 29 में है, मदीना मुसहफ़ के पृष्ठ 580-581 पर।