सूरह Al-Muddaththir

سورة المدثر

क़ुरआन की 114 सूरतों में 74वीं, मक्की, 56 आयतें। उस्मानी लिपि में पूरा अरबी पाठ (हफ़्स अन आसिम) और हिंदी अनुवाद।

#74मक्की56 आयतें
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सूरह संख्या
74
आयतें
56
अवतरण
मक्की
पारा
29
मुसहफ़ के पृष्ठ
575-577

सुनें · Mishary Rashid Alafasy

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

يَٰٓأَيُّهَا ٱلْمُدَّثِّرُ ﴿١﴾

1ऐ (मेरे) कपड़ा ओढ़ने वाले (रसूल) उठो

قُمْ فَأَنذِرْ ﴿٢﴾

2और लोगों को (अज़ाब से) डराओ

وَرَبَّكَ فَكَبِّرْ ﴿٣﴾

3और अपने परवरदिगार की बड़ाई करो

وَثِيَابَكَ فَطَهِّرْ ﴿٤﴾

4और अपने कपड़े पाक रखो

وَٱلرُّجْزَ فَٱهْجُرْ ﴿٥﴾

5और गन्दगी से अलग रहो

وَلَا تَمْنُن تَسْتَكْثِرُ ﴿٦﴾

6और इसी तरह एहसान न करो कि ज्यादा के ख़ास्तगार बनो

وَلِرَبِّكَ فَٱصْبِرْ ﴿٧﴾

7और अपने परवरदिगार के लिए सब्र करो

فَإِذَا نُقِرَ فِى ٱلنَّاقُورِ ﴿٨﴾

8फिर जब सूर फूँका जाएगा

فَذَٰلِكَ يَوْمَئِذٍۢ يَوْمٌ عَسِيرٌ ﴿٩﴾

9तो वह दिन काफ़िरों पर सख्त दिन होगा

عَلَى ٱلْكَٰفِرِينَ غَيْرُ يَسِيرٍۢ ﴿١٠﴾

10आसान नहीं होगा

ذَرْنِى وَمَنْ خَلَقْتُ وَحِيدًۭا ﴿١١﴾

11(ऐ रसूल) मुझे और उस शख़्श को छोड़ दो जिसे मैने अकेला पैदा किया

وَجَعَلْتُ لَهُۥ مَالًۭا مَّمْدُودًۭا ﴿١٢﴾

12और उसे बहुत सा माल दिया

وَبَنِينَ شُهُودًۭا ﴿١٣﴾

13और नज़र के सामने रहने वाले बेटे (दिए)

وَمَهَّدتُّ لَهُۥ تَمْهِيدًۭا ﴿١٤﴾

14और उसे हर तरह के सामान से वुसअत दी

ثُمَّ يَطْمَعُ أَنْ أَزِيدَ ﴿١٥﴾

15फिर उस पर भी वह तमाअ रखता है कि मैं और बढ़ाऊँ

كَلَّآ ۖ إِنَّهُۥ كَانَ لِءَايَٰتِنَا عَنِيدًۭا ﴿١٦﴾

16ये हरगिज़ न होगा ये तो मेरी आयतों का दुश्मन था

سَأُرْهِقُهُۥ صَعُودًا ﴿١٧﴾

17तो मैं अनक़रीब उस सख्त अज़ाब में मुब्तिला करूँगा

إِنَّهُۥ فَكَّرَ وَقَدَّرَ ﴿١٨﴾

18उसने फिक्र की और ये तजवीज़ की

فَقُتِلَ كَيْفَ قَدَّرَ ﴿١٩﴾

19तो ये (कम्बख्त) मार डाला जाए

ثُمَّ قُتِلَ كَيْفَ قَدَّرَ ﴿٢٠﴾

20उसने क्यों कर तजवीज़ की

ثُمَّ نَظَرَ ﴿٢١﴾

21फिर ग़ौर किया

ثُمَّ عَبَسَ وَبَسَرَ ﴿٢٢﴾

22फिर त्योरी चढ़ाई और मुँह बना लिया

ثُمَّ أَدْبَرَ وَٱسْتَكْبَرَ ﴿٢٣﴾

23फिर पीठ फेर कर चला गया और अकड़ बैठा

فَقَالَ إِنْ هَٰذَآ إِلَّا سِحْرٌۭ يُؤْثَرُ ﴿٢٤﴾

24फिर कहने लगा ये बस जादू है जो (अगलों से) चला आता है

إِنْ هَٰذَآ إِلَّا قَوْلُ ٱلْبَشَرِ ﴿٢٥﴾

25ये तो बस आदमी का कलाम है

سَأُصْلِيهِ سَقَرَ ﴿٢٦﴾

26(ख़ुदा का नहीं) मैं उसे अनक़रीब जहन्नुम में झोंक दूँगा

وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا سَقَرُ ﴿٢٧﴾

27और तुम क्या जानों कि जहन्नुम क्या है

لَا تُبْقِى وَلَا تَذَرُ ﴿٢٨﴾

28वह न बाक़ी रखेगी न छोड़ देगी

لَوَّاحَةٌۭ لِّلْبَشَرِ ﴿٢٩﴾

29और बदन को जला कर सियाह कर देगी

عَلَيْهَا تِسْعَةَ عَشَرَ ﴿٣٠﴾

30उस पर उन्नीस (फ़रिश्ते मुअय्यन) हैं

وَمَا جَعَلْنَآ أَصْحَٰبَ ٱلنَّارِ إِلَّا مَلَٰٓئِكَةًۭ ۙ وَمَا جَعَلْنَا عِدَّتَهُمْ إِلَّا فِتْنَةًۭ لِّلَّذِينَ كَفَرُوا۟ لِيَسْتَيْقِنَ ٱلَّذِينَ أُوتُوا۟ ٱلْكِتَٰبَ وَيَزْدَادَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ إِيمَٰنًۭا ۙ وَلَا يَرْتَابَ ٱلَّذِينَ أُوتُوا۟ ٱلْكِتَٰبَ وَٱلْمُؤْمِنُونَ ۙ وَلِيَقُولَ ٱلَّذِينَ فِى قُلُوبِهِم مَّرَضٌۭ وَٱلْكَٰفِرُونَ مَاذَآ أَرَادَ ٱللَّهُ بِهَٰذَا مَثَلًۭا ۚ كَذَٰلِكَ يُضِلُّ ٱللَّهُ مَن يَشَآءُ وَيَهْدِى مَن يَشَآءُ ۚ وَمَا يَعْلَمُ جُنُودَ رَبِّكَ إِلَّا هُوَ ۚ وَمَا هِىَ إِلَّا ذِكْرَىٰ لِلْبَشَرِ ﴿٣١﴾

31और हमने जहन्नुम का निगेहबान तो बस फरिश्तों को बनाया है और उनका ये शुमार भी काफिरों की आज़माइश के लिए मुक़र्रर किया ताकि अहले किताब (फौरन) यक़ीन कर लें और मोमिनो का ईमान और ज्यादा हो और अहले किताब और मोमिनीन (किसी तरह) शक़ न करें और जिन लोगों के दिल में (निफ़ाक का) मर्ज़ है (वह) और काफिर लोग कह बैठे कि इस मसल (के बयान करने) से ख़ुदा का क्या मतलब है यूँ ख़ुदा जिसे चाहता है गुमराही में छोड़ देता है और जिसे चाहता है हिदायत करता है और तुम्हारे परवरदिगार के लशकरों को उसके सिवा कोई नहीं जानता और ये तो आदमियों के लिए बस नसीहत है

كَلَّا وَٱلْقَمَرِ ﴿٣٢﴾

32सुन रखो (हमें) चाँद की क़सम

وَٱلَّيْلِ إِذْ أَدْبَرَ ﴿٣٣﴾

33और रात की जब जाने लगे

وَٱلصُّبْحِ إِذَآ أَسْفَرَ ﴿٣٤﴾

34और सुबह की जब रौशन हो जाए

إِنَّهَا لَإِحْدَى ٱلْكُبَرِ ﴿٣٥﴾

35कि वह (जहन्नुम) भी एक बहुत बड़ी (आफ़त) है

نَذِيرًۭا لِّلْبَشَرِ ﴿٣٦﴾

36(और) लोगों के डराने वाली है

لِمَن شَآءَ مِنكُمْ أَن يَتَقَدَّمَ أَوْ يَتَأَخَّرَ ﴿٣٧﴾

37(सबके लिए नहीें बल्कि) तुममें से वह जो शख़्श (नेकी की तरफ़) आगे बढ़ना

كُلُّ نَفْسٍۭ بِمَا كَسَبَتْ رَهِينَةٌ ﴿٣٨﴾

38और (बुराई से) पीछे हटना चाहे हर शख़्श अपने आमाल के बदले गिर्द है

إِلَّآ أَصْحَٰبَ ٱلْيَمِينِ ﴿٣٩﴾

39मगर दाहिने हाथ (में नामए अमल लेने) वाले

فِى جَنَّٰتٍۢ يَتَسَآءَلُونَ ﴿٤٠﴾

40(बेहिश्त के) बाग़ों में गुनेहगारों से बाहम पूछ रहे होंगे

عَنِ ٱلْمُجْرِمِينَ ﴿٤١﴾

41कि आख़िर तुम्हें दोज़ख़ में कौन सी चीज़ (घसीट) लायी

مَا سَلَكَكُمْ فِى سَقَرَ ﴿٤٢﴾

42वह लोग कहेंगे

قَالُوا۟ لَمْ نَكُ مِنَ ٱلْمُصَلِّينَ ﴿٤٣﴾

43कि हम न तो नमाज़ पढ़ा करते थे

وَلَمْ نَكُ نُطْعِمُ ٱلْمِسْكِينَ ﴿٤٤﴾

44और न मोहताजों को खाना खिलाते थे

وَكُنَّا نَخُوضُ مَعَ ٱلْخَآئِضِينَ ﴿٤٥﴾

45और अहले बातिल के साथ हम भी बड़े काम में घुस पड़ते थे

وَكُنَّا نُكَذِّبُ بِيَوْمِ ٱلدِّينِ ﴿٤٦﴾

46और रोज़ जज़ा को झुठलाया करते थे (और यूँ ही रहे)

حَتَّىٰٓ أَتَىٰنَا ٱلْيَقِينُ ﴿٤٧﴾

47यहाँ तक कि हमें मौत आ गयी

فَمَا تَنفَعُهُمْ شَفَٰعَةُ ٱلشَّٰفِعِينَ ﴿٤٨﴾

48तो (उस वक्त) उन्हें सिफ़ारिश करने वालों की सिफ़ारिश कुछ काम न आएगी

فَمَا لَهُمْ عَنِ ٱلتَّذْكِرَةِ مُعْرِضِينَ ﴿٤٩﴾

49और उन्हें क्या हो गया है कि नसीहत से मुँह मोड़े हुए हैं

كَأَنَّهُمْ حُمُرٌۭ مُّسْتَنفِرَةٌۭ ﴿٥٠﴾

50गोया वह वहशी गधे हैं

فَرَّتْ مِن قَسْوَرَةٍۭ ﴿٥١﴾

51कि येर से (दुम दबा कर) भागते हैं

بَلْ يُرِيدُ كُلُّ ٱمْرِئٍۢ مِّنْهُمْ أَن يُؤْتَىٰ صُحُفًۭا مُّنَشَّرَةًۭ ﴿٥٢﴾

52असल ये है कि उनमें से हर शख़्श इसका मुतमइनी है कि उसे खुली हुई (आसमानी) किताबें अता की जाएँ

كَلَّا ۖ بَل لَّا يَخَافُونَ ٱلْءَاخِرَةَ ﴿٥٣﴾

53ये तो हरगिज़ न होगा बल्कि ये तो आख़ेरत ही से नहीं डरते

كَلَّآ إِنَّهُۥ تَذْكِرَةٌۭ ﴿٥٤﴾

54हाँ हाँ बेशक ये (क़ुरान सरा सर) नसीहत है

فَمَن شَآءَ ذَكَرَهُۥ ﴿٥٥﴾

55तो जो चाहे उसे याद रखे

وَمَا يَذْكُرُونَ إِلَّآ أَن يَشَآءَ ٱللَّهُ ۚ هُوَ أَهْلُ ٱلتَّقْوَىٰ وَأَهْلُ ٱلْمَغْفِرَةِ ﴿٥٦﴾

56और ख़ुदा की मशीयत के बग़ैर ये लोग याद रखने वाले नहीं वही (बन्दों के) डराने के क़ाबिल और बख्यिश का मालिक है

क़ुरआन का पाठ: तंज़ील प्रोजेक्ट (tanzil.net), उस्मानी लिपि, हूबहू प्रति, CC BY 3.0। अनुवाद: सुहेल फ़ारूक़ ख़ान और सैफ़ुर्रहमान नदवी।

सूरह Al-Muddaththir में कितनी आयतें हैं?

सूरह Al-Muddaththir में 56 आयतें हैं।

सूरह Al-Muddaththir मक्की है या मदनी?

सूरह Al-Muddaththir मक्की सूरह है, मुसहफ़ के क्रम में 74वीं।

सूरह Al-Muddaththir किस पारे में है?

सूरह Al-Muddaththir पारा 29 में है, मदीना मुसहफ़ के पृष्ठ 575-577 पर।